अष्टम भाव का परिचय

अष्टम भाव परिचय

मृत्यु। गुढ़ ज्ञान। पत्नी या धन। ससुराल। LIC । अचानक धन जो कभी सोचा ही नही था ख्वाब में। म्यूच्यूअल फण्ड। जीवन का अंतिम पड़ाव। मृत्यु कैसे होगी। पुश्तेनी जमीन। वृश्चिक राशि। क्षिद्र भाव। गुदा स्थान। लिंग।

*बुध ग्रहण करने की क्षमता है। यहां बैठा बुध अच्छा वैज्ञानिक। सन्त है तो माया को समझने वाला। छात्र है तो रिसर्च करने वाला। ज्योतिषी है तो ज्योतिष के गूढ़ ज्ञान को समझने वाला। शनि यहां है तो ज्योतिष में अच्छी सफलता। सूर्य केतु मंगल यहाँ पाइल्स दे ही देते है।

*गुरु यहां बताएगा कि पैतृक संपत्ति जो है उसका मार्किट वैल्यू बहुत अच्छा मिलेगा। शुक्र बताएगा 2 मंजिला पैतृक मकान। चन्द्र खेती की जमीन। शनि पैतृक इंडस्ट्रियल जमीन। सूर्य कोई सरकारी पैतृक जमीन। बुध पैतृक मकान जिसके नीचे दुकान। आदि आदि।

*राहु तो एकदम खोजी बना ही देगा यहां मेरे ख्याल से।

*शनि यहां आयु खूब देता है। लेकिन यही शनि दरिद्रता भी देता है।

*अष्टमेष ओर अष्टम भाव को कभी शुभ नही माना। यहां तक कि इस भाव पे दृष्टि डालने वाले ग्रह भी बिगड़ जाते है।

*इस भाव के पहले द्रेष्काण ओर नवमांश के स्वामी भी पीड़ा देने वाले होते है।

*अब पिता आपके ऊपर कितना खर्च करेगा ये भी इस भाव से देखो। क्योंकि पिता का नाश भाव यही तो है। पिता ने आपके लिए फण्ड। LIC कितनी करवाई है यहि से तो देखेंगे।

*मृत्यु भी यही से ही तो देखेंगे।और अष्टम से अष्टम तृतीय मृत्यु की मृत्यु दिखा देगा। इसलिए तृतीय भी खराब ही समझ लो मृत्यु के लिए तो।

*मृत्यु का पराक्रम मतलब दशम। दशम बिगड़ा तो सिर्फ कर्म ही खराब नही होगा मृत्यु भी बिगड़ जाएगी। इसका धन मतलब नवम्। ओर इसका सुख मतलब एकादश भाव बिगड़ा तो मृत्यु का सुख भी नही मिलेगा पता नही कितनी त्तक्लीफ से मरेंगे। मतलब एकादश लाभ ही नही मृत्यु को भी बिगाड़ देगा। मृत्यु की योजना या मृत्यु का ज्ञान या मृत्यु की विद्या या गुढ़ ज्ञान की विद्या या योजना मतलब द्वादश भाव इन सब के बारे में बता ही देगा। बस इसीलिए तो इसके विद्या भाव मतलब द्वादश भाव इतना महत्वपूर्ण है। इस पे राहु शनि की दृष्टि या यहाँ द्वादश भाव मे बैठे राहु केतु तंत्र विद्या में रुचि पैदा कर ही देते होंगे। राहु शनि दोनो ही वाम मार्ग की तरफ जो ले जाते है।

*यह भाव बलि है तो LIC और म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्टमेंट कर ही देगें।

*आपके पैसे का कितना नुकसान होने वाला है ये भी तो देखना पड़ेगा न अष्टम भाव, द्वितीय भाव का विपरीत भाव जो है। बचाया हुआ पैसा द्वितीय भाव ही तो है। मतलब ये द्वितीय से बलि है तो पैसा बचेगा नही लेकिन अकस्मात धन तो दिला ही देगा राहु की तरह। गड़ा हुआ खजाना समझो  भाई।

*कुछ विद्वान इस भाव को ज्योतिष का भी कारक भाव मानते है। ये भी हो सकता है ।

*इसका षष्टम भाव लग्न है और ये लग्न से अष्टम है इसीलिए तो अष्टमेष ओर लग्नेश का स्थान परिवर्तन यही तो खराब बताता है।

*द्वितीय इसका विपरीत भाव। इसका प्रितिद्वन्दी। एक दूसरे के विपरीत। एक पति का परिवार तो दूसरा पत्नी का परिवार। दोनो आमने सामने। एक भी बिगड़ा तो दूसरे को भी बिगाड़ देगा। एक सुधरा तो दूसरे को भी सुधार देगा। दोनो का धन। इसी लिए तो दोनो में से एक भी जगह शुभ ग्रह बैठेगा तो दूसरे भाव पे शुभ दृष्टि डाल ही देगा।

*इसकी मृत्यु तृतीय भाव। मतलब उसको भी पीड़ित कर दिया।

*इसका भाग्य चतुर्थ भाव। अब बोलते है न हमारे भाग में पता नही कैसे मरना लिखा है। वो देखना हो तो चतुर्थ भाव से देख लो। अब सोच लो माता को परेशान किया तो चतुर्थ भाव बिगड़ जाएगा और मृत्यु भी अपना भाग्य बिगाड़ लेगी।

*इसका कर्म पंचम, मतलब पुत्र भाव। पुत्र का सुख भाव अष्टम, मतलब मृत्यु भाव।

*इसका लाभ षष्टम और षष्टम का पराक्रम यह भाव मतलब अष्टम भाव। रोग का पराक्रम यही भाव तो है। और इसका लाभ स्थान- रोग भाव। मतलब ये दोनों भाव एक दूसरे से जुड़े है। रोग बढ़ेगा तो मृत्यु होगी। और षष्टम बढ़ेगा तो मृत्यु से लाभ। अंत मे इसका नाश मतलब सप्तम भाव। मृत्यु का नाश। लग्न देह। देह की मृत्यु अष्टम भाव। देह की मृत्यु का नाश सप्तम भाव। यानि अंत मे मृत्यु।

*ये भाव कर्म का लाभ स्थान है। शुभ फल भी बहुत देता है। यहां शुभ ग्रह होना, दृष्टि होना, इस भाव का बलि होना कर्म क्षेत्र में सफलता भी दिलाता है। कर्म का लाभ स्थान जो है।

*लाभ स्थान से दशम होने से ये लाभ स्थान पे पूर्ण प्रभाव रखता है।

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