नवमांश क्या है ? नवमांश Kundali का परिचय

नवमांश – परिचय

इन्दु: सर्वत्र बीजाम्भो लग्नं तु कुसुमप्रभम्।
फलेन सदृशोंऽशश्च भावः स्वादुसमः स्मृतः।।
अर्थ:- चन्द्रमा बीज के, लग्न पुष्प के, नवांश फल के तथा भाव स्वाद के समान होता है।
जन्म कुण्डली शरीर है तो नवमांश कुण्डली की आत्मा दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं।

परिचय :- नवमांश एक राशि के नवम भाग को कहते हैं जो अंश 20 कला का होता है अर्थात एक राशि में नौ राशियों के नवमांश होते हैं। नौ नवमांश प्रति राशि में किन किन राशियों में होते हैं इसका एक नियम हैं जैसे मेष में पहला नवमांश मेष का, दूसरा नवमांश वृष का, तीसरा नवमांश मिथुन का, चौथा कर्क का, पांचवां सिंह का, छठा कन्या का, सातवां तुला का, आठवां वृश्चिक का और नवम धनु राशि का होता है।

नवम नवमांश में मेष राशि की समाप्ति होती है और वृष राशि का प्रारम्भ होता है। वृष राशि में प्रथम नवांश मेष राशि के अंतिम नवांश से आगे होता है। इसी प्रकार वृष में पहला नवांश मकर का, दूसरा कुम्भ का, तीसरा मीन का, चौथा मेष का, पांचवां वृष का, छठा मिथुन का सातवां कर्क का, आठवां सिंह का और नवम कन्या का होता है।

मिथुन राशि में पहला नवांश तुला राशि का, दूसरा वृश्चिक राशि का, तीसरा धनु राशि का, चौथा मकर राशि का, पांचवां कुम्भ राशि का, छठा मीन राशि का, सातवां मेष राशि का, आठवां वृष राशि का और नवम मिथुन का नवमांश होता है। इसी प्रकार से आगे राशियों के नवमांश चलते हैं।

नवमांश की गणितीय विधि:-नवमांश ज्ञात करने के लिए ज्योतिषशास्त्र में गणितीय विधि दी गई है जिसके अनुसार अभीष्ट संख्या में राशि अंक को 9 से गुणा किया जाता है और जो गुणनफल आता है उसके अंशों में 3/20 का भाग देने से जो नवमांश ज्ञात होता है उसे जोड़ देने से नवांश ज्ञात हो जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि नवमांश 12 से अधिक होने पर इसमें भाग देने से जो शेष आता है वही नवमांश माना जाता है।

जन्म कुण्डली नवमांश कुंडली


जन्म कुण्डली शरीर है तो नवमांश कुण्डली आत्मा दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। जन्म कुण्डली के बिना ग्रहों का फलित ज्ञात नहीं किया जा सकता। यह ग्रहों के बलाबल और जीवन के उतार चढ़ाव को दर्शाता है।

लग्न कुण्डली में जो ग्रह अशुभ स्थिति में होते हैं और नवमांश में शुभ स्थिति में तो वह ग्रह अशुभ नहीं बल्कि शुभफलदायी कहलाते हैं। यदि ग्रह लग्न लग्न और नवमांश दोनों में एक ही राशि में होते हैं तो अति शुभ यानी वर्गोत्तम कहा जाता है। लग्नेश और नवांशेश दोनों का आपसी सम्बन्ध जन्म कुण्डली और नवांश कुण्डली में शुभ हो तो व्यक्ति का जीवन सुखमय होता है।

ज्योतिषशास्त्र यह भी कहता है कि लग्न कुण्डली में राजयोग है और नवमांश में स्थिति विपरीत तो राजयोग का फल नहीं मिलता है लेकिन अगर जन्म कुण्डली में स्थिति अच्छी नहीं है और नवमांश में राजयोग बन रहा है तो राजसुख मिलता है। विवाह के संदर्भ में लग्न कुण्डली में वर वधु की कुण्डली नहीं मिलती है और नवमांश में मिल रही है तो विवाह के लिए स्थिति उत्तम मानना चाहिए।

नवमांश के बारे में कुछ रोचक बातें
अग्नितत्व राशि का प्रथम नवमांश मेष होता है, पृथ्वीतत्व का मकर, वायुतत्व का तुला तथा जलतत्व का कर्क। किसी राशि में पहला नवमांश और अंतिम नवमांश उसी तत्त्व के होते हैं जिस तत्त्व की राशि है। जैसे की मेष अग्नितत्व राशि है और उसका पहला नवमांश मेष अग्नितत्व होता है तथा अंतिम धनु भी अग्नितत्व चर राशियों में प्रथम नवमांश वर्गोत्तम, स्थिर राशियों में पांचवाँ नवमांश और द्विस्वभाव राशियों में नववां नवमांश वर्गोत्तम है।

नवमांश के उपयोग
बृहत्पाराशरहोराशास्त्र में पाराशर मुनि कहते हैं “नवमांशे कलत्राणां दशमांशे महत्फलम्” अर्थात नवमांश कुंडली से पत्नी/पति का विचार किया जाता है। एक अच्छा ज्योतिषी आपकी नवमांश कुंडली देखकर आपकी पत्नी के बारे में सटीक भविष्यवाणी कर सकता है। मैंने तो यहाँ तक पाया है की अगर आपकी कुंडली में गजकेसरी योग है तो आपकी पत्नी/पति की नवमांश कुंडली में गजकेसरी योग होने की प्रबल संभावना है।

पराशर के अनुसार जिस व्यक्ति की जन्म कुन्डली एवं नवांश कुण्डली में एक ही राशि होती है तो उसका वर्गोत्तम नवमांश होता है वह शारीरिक व आत्मिक रुप से स्वस्थ होता है।
*अगर कोई ग्रह जिस राशि में है उसी नवमांश में भी हो तो वर्गोत्तम कहलाता है।
* वर्गोत्तम ग्रह शुभ फल देता है।
* अगर कोई ग्रह जन्म कुण्डली में नीच का हो एवं नवांश कुण्डली में उच्च को हो तो वह अपेक्षाकृत शुभ फल प्रदान करता है
* लग्न के नवमांशाधिपति से जातक के शरीर की आकृति, गठन इत्यादि का पता लगाया जा सकता है।
* चन्द्रमा के नवमांश से जातक के रंग का पता लगाया जा सकता है।
* कलत्र-राशि निकालने में नवमांश कुंडली का ही उपयोग होता है।
* विवाह समय निर्धारण में गुरु की नवमांश में गोचर स्तिथि देखना कुछ लोग अनिवार्य मानते हैं।
* सन्तानोपत्ति-शक्ति देखने के लिए पुरुष का बीज स्फुट और स्त्री का क्षेत्र स्फुट नवमांश में किस राशि में है यह देखना अनिवार्य है।
* सन्तानोपत्ति के सही समय का आंकलन भी बिना नवमांश कुंडली के असम्भव ही होता है।
* दशमेश का नवमांशेश और उस पर विभिन्न ग्रहों का प्रभाव जातक के व्यवसाय का सही विवरण देता है।
* ज्योतिष ग्रंथो में बहुत से राजयोग सिर्फ नवमांश कुंडली के आधार पर ही बताये गए हैं, जैसे की अगर लग्नेश, एकादशेश, द्वितीयेश तथा नवमेश उच्च नवमांश में हो जातक करोड़पति होता है। इसी तरह बहुत से योग

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