फलादेश करने से पहले ध्यान रखो हमेशा की…..

ध्यान रखो हमेशा

1. भाव
2. भाव मध्य युति
3. भावेश
4. भावकारक
5. भाव पर दृष्टि
6. कुण्डलि में शुभ ग्रह और अशुभ ग्रह
7. शुभ और अशुभ ग्रह
8. पाप ग्रहों कि दृष्टि
9. नवांश
10. नेशर्गिक और तात्कालिक शत्रु और मित्र
11. ग्रहों का बल
12. निच
13. उच्च
14. भाव का कारक्तव
15. ग्रहों का कारक्तव
16. पाप कत्रि दोश
17. शुभ कत्रि योग
18. नक्षत्र स्थति
19. शुक्र से सप्तम स्त्री, गुरु से पंचम पुत्र, सुर्य से दशम पिता, चंद्रमा से चतुर्थ माता आदि विचार
20. भाव से भाव से भाव,, ग्रह से भाव , भाव से तथा ग्रह से विचार करना (पंचम से पंचम, ग्रब से पंचम)
21. बाधक ग्रह
22. चन्द्रमा अपने से अष्टम स्थान कि हानि करता है
1. चर, स्थिर, द्विस्वभाव राशियां
2. पर्षठोदय, उभयोदय, शिर्षोदय राशियां
3. पुरुष और स्त्रि राशियां
4. क्रुर और स्योमं
5. रात्रि और दिन कि राशियां
6. राशियों कि दिशा
7. चन्द्र और सुर्य कि राशियां
8. जल, भूमि, तोयाश्र राशियां
9. धातु, जिव, मूल राशिया.
10. राशियों कि जाति
11. राशियों का वर्ण
12. राशियों कि वस्तु
13. हस्व, सम, दिर्ध राशियां

1. ग्रहों के वर्ण
2. ग्रहों कि दिशा
3. वात, पित्त, कफ के अधिपति
4. पुरुष और स्त्रि ग्रह
5. ग्रहों का त्तव
6. ग्रहों कि ऋतु
7. ग्रहो का काल
8. आत्मा, चित्त आदि कारक
9. ग्रहों का स्वरुप
10. ग्रहों का वय
11. ग्रहों का अवस्था (दीप्त, प्रमुदित, स्वस्थ, शान्त, शक्त, प्रपीडि.त, दिन, खल, विकल,भीत)
12. ग्रहों के स्थान
13. ग्रहों कि जाति
14. ग्रहों के गुण
15. ग्रहों का रस
16. बल (स्थानबल, दिग्बल, कालबल, चेष्टाबल, नैसर्गिकबल, अयनबल)

1. पित्र दोश
2. मंगल दोश
3. कालसर्प दोश
4. आयु योग वं दोश
5. रेका योग
6. राज योग
7. चन्द्र योग
8. सुर्य योग
9. अष्टक वर्ग
10. वर्ष फल
11. षडबल
12. कर्मयोग
13. रोग विचार
14. रत्न विघान
15. विवाहिक जिवन
16. साढे साति
17. ढ्ढया
18. कंटक शनी

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