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नवमांश क्या है ? नवमांश Kundali का परिचय

नवमांश – परिचय इन्दु: सर्वत्र बीजाम्भो लग्नं तु कुसुमप्रभम्। फलेन सदृशोंऽशश्च भावः स्वादुसमः स्मृतः।। अर्थ:- चन्द्रमा बीज के, लग्न पुष्प के, नवांश फल के तथा भाव स्वाद के समान होता है।जन्म कुण्डली शरीर है तो नवमांश कुण्डली की आत्मा दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। परिचय :- नवमांश एक राशि के नवम भाग को …

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ज्योतिष एवं चिकित्सा। भारतवर्ष में चिकित्साशास्त्र (आयुर्वेद) का ज्योतिष से बहुत गहरा संबंध है।

ज्योतिष एवं चिकित्सा ज्योतिष शास्त्र भविष्य दर्शन की आध्यात्मिक विद्या है। भारतवर्ष में चिकित्साशास्त्र (आयुर्वेद) का ज्योतिष से बहुत गहरा संबंध है। होमियोपैथ की उत्पत्ति भी ज्योतिष शास्त्र के आधार पर ही हुआ है I जन्मकुण्डली व्यक्ति के जन्म के समय ब्रह्माण्ड में स्थित ग्रह नक्षत्रों का मानचित्र होती है, जिसका अध्ययन कर जन्म के …

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फलादेश करने से पहले ध्यान रखो हमेशा की…..

ध्यान रखो हमेशा 1. भाव2. भाव मध्य युति3. भावेश4. भावकारक5. भाव पर दृष्टि6. कुण्डलि में शुभ ग्रह और अशुभ ग्रह7. शुभ और अशुभ ग्रह8. पाप ग्रहों कि दृष्टि9. नवांश10. नेशर्गिक और तात्कालिक शत्रु और मित्र11. ग्रहों का बल12. निच13. उच्च14. भाव का कारक्तव15. ग्रहों का कारक्तव16. पाप कत्रि दोश17. शुभ कत्रि योग18. नक्षत्र स्थति19. शुक्र …

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पंचांग के अंगों के फल

               पंचांग के अंगों के फल              योग फल विष्कुम्भरूपवान, भाग्यवान, अनेक तरह के अलंकारों से पूर्ण, बुद्धिमान और पंडित होता है| प्रीतिस्त्रियों का प्यारा, तत्व को जानने वाला, उत्साही और स्वार्थ के लिए काम करने वाला होता है| आयुष्मानमानी, धनवान, शेर ओ शायरी करेने वाला, बहुत वर्षों तक जीने वाला,युद्ध में विजयी होता है| सौभाग्यराजा …

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प्रेम सम्बन्ध के योग एवं शुक्र और चन्द्र ग्रह का प्रभाव ।

                 प्रेम सम्बन्ध के योग। शुक्र और चन्द्र ग्रह का प्रभाव। ज्योतिष विद्या के अनुसार ग्रहो का प्रभाव हर किसी की मनोदशा को प्रभावित करता है। जन्म के समय ग्रहो की जैसी स्थिति होती है वैसा हीं मनुष्य का स्वभाव हो जाता है। जन्म कुण्डली में शुक्र को प्रेम का कारक ग्रह माना जाता है। …

प्रेम सम्बन्ध के योग एवं
शुक्र और चन्द्र ग्रह का प्रभाव ।
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